Tuesday, 31 January 2012

WAQT [TIME] Poem in Hindi by Naresh Sonee written in 1975- Age 17


Naresh Sonee Sohum Sutra 
Author of Brahmand Pujan [1999 ]  - Worship Universe

नरेश सोनी ' सोहम सूत्र ' का जन्म  ११-२-१९५८  में फगवारा, पंजाब में हुआ. ११ साल की उम्र से ही कवितायेँ लिखना शुरू की. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओ में कवितायेँ और लेख लिखते है. ख़ास रूचि अध्यात्मिक विषयों पर लिखने की है.  


सन १९९९ में ' ब्रह्माण्ड पूजन' ' नाम से केवल ३१ पन्नों की पुस्तक गद्य व पद्य में लिखी,  जिसे  [२०१०]  हाई कोर्ट के  माननीय  जस्टिस,  जज, लोकआयुक्त, [२०११]  भारत सरकार से जुड़े पृथ्वी भूगोल विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्रालय मिनिस्टर, विभिन्न दल के मिनिस्टर्स,  एम्. एल. ऐ, मेयर, सभी पढ़कर प्रभावित हुए.  


विश्व कल्याण के हित में, अधिक से अधिक लोग यह आधुनिक, अध्यात्मिक ग्रन्थ अध्ययन-ग्रहण करे, ऐसी  इच्छा  न्यायाधीशों और  मंत्रियों  ने व्यक्त की. 


वकीलों ने लेखक को आधुनिक युग का सरस्वती प्रधान महान संत कहा. पत्रकारों- लेखकों ने कहा- अब प्राचीन के इसराइल में नहीं, बल्कि आधुनिक युग में एक बार फिर ' मोज़स'  पैदा हुआ है. 


लेखक ने मानो  चंद शब्दों में,  गागर में सागर समेट दिया है. विश्व में, पुरातन काल से आज के युग  तक  किसी  ने  भी      ' ब्रह्माण्ड पूजन ' शीर्षक से ग्रन्थ नहीं लिखा, ना रचा . आगे चलकर भी यदि कोई ' ब्रह्माण्ड पूजन'  नाम से पुस्तक लिखने की पहल  या चेष्टा करेंगे,  तब  भी  वह  नकली [duplicate ]  ' ब्रह्माण्ड पूजन '  ही  कहलाएगी.  ऐसा इस रचना को पढने वालों का मानना है.

मुंबई में इंग्लिश मीडियम स्कूल  से पढने के बावजूद, जब लेखक  [ १९७५ ]  दसवी कक्षा में थे, तब की कविता का  नमूना , लेखक की   [ गंभीर व गहरी सोच ]  की - झलक यहाँ निम्न दी कविता से मिलती है.  लेखक उर्दू, पंजाबी, मराठी, [ मुम्बईया ] या सभी भारतीय भाषाओँ के शब्द इस्तेमाल करने में परहेज़ नहीं करते.

' भाषा '  से  ज्यादा   ' सोच '  बड़ी होनी चाहिए,  जिसे विश्वस्तर या  चाहे  किसी भी कसौटी पर  रख ,  ' तर्क  ज्ञान ' के तराजू में तोला जाये तो शत प्रतिशत खरी निकालनी चहिये, ऐसा लेखक का मानना है.  भाषा तो इंसानों में सिर्फ अपनी बात रखने - कहने-करने का अंदाज़ है.  भाषा थोड़ी या ज्यादा जानने से, कोई  बड़ा- छोटा, तुच्छ या महान नहीं हो जाता.  इसमे भेदभाव नहीं  बरतना  चाहिए.


!!  वक्त जिसका है, उसका खुदा है, वक्त है तो खुदा है !!  

कौन कहता है, खुदा बड़ा होता है,  दोस्तों खुदा तो बेवफा होता है,
खुदा तो यारों हँसता है, जैसे देख ज़माना हँसता है,
उस वक्त, वक्त ही हम से खफा होता है -

यह तुम कहते हो की खुदा दयालु है,  अरे वह तो तमाशबीन है,
जीना है तो वक्त को याद रखो,  वह भी वक्त के अधीन है,

खुश और नरम जब वक्त होता है, तो दीन के पास भी ताजो-तख़्त होता है,
राजा को भी रंक बना दे क्षण में,  वक्त जब नाराज़ और सख्त होता है,

अजी, वक्त को करेगा कौन सीधा, वक्त की अजीब सी सीधी- टेढ़ी चाल है,
कल बिगाड़े, आज संवारे, कीमत उसकी हर पल, दिन, महीने, साल है,

क्या बिगाड़े उसका आग और पानी,  वक्त जिस पर मेहरबान है,
जुट जाये चाहे ज़मीं आसमान,  तब तो चींटी भी पहलवान है,

लोग कहते है , ' खुदा के बन्दों ', जिसका कोई नहीं, उसका खुदा होता है,
लेकिन मैं कहता हूँ,  वक्त जिसका नहीं,  उससे खुदा भी जुदा होता है,

खुदा भी उसका होता है  ' वक्त के बन्दों ', जिसके साथ होता है वक्त,
आज का दोस्त,  कल का दुश्मन,  वक्त बड़ा है सख्त,

वक्त ही प्यार, वक्त ही दौलत, वक्त ही इज्ज़त, वक्त ही इंसान का सज्जन है,
वक्त ही भूख, वक्त ही प्यास, वक्त ही श्वास, वक्त ही इंसान का दुश्मन है,

वक्त ही अच्छा, बुरा वही है, वक्त ने ही बिछाई यह सारी माया है,
वक्त ही मौत,  ज़िन्दगी वही है,  वक्त है तो हमारा साया है,

वक्त ही हार,  वक्त ही जीत ,  यह वक्त की बदलती बहार है,
घडी में तौला,  घडी में मासा,  वक्त बड़ा मक्कार है,

इसलिये  ' मेरे दोस्त ', वक्त की पूजा कर,  रख हमेशा उसको याद,
पछतावा बाद में क्या करना,  वक्त गुज़र जाने के बाद,

वक्त से  अठखेलियां  ना करना,  उसे सर - आँखों पर रख,
छेड़खानी उससे  की , तो  ' ऐ  शख्स ',  रहेगा  ना  कख,

वक्त  ही  है  जो  तुम्हे लाया है, वक्त ही हमे ले जाएगा,
पालना उसी ने ही किया है, वही अर्थी में ले जाएगा .

   - नरेश सोनी  ' सोहम सूत्र '  [ काव्य रचना  १९७५ ] - 





Naresh Sonee [ Sohum Sutra]   born on 11the Feb, 1958, Phagwara Punjab is an author of a holy book BRAHMAND PUJAN published in 1999 at the age of 41. This book is a non mythological, non superstitious but a sacred scripture. However the hallowed verses in the book are fearless coherent spiritual encounters with GOD BRAHMAND  [GOD UNIVERSE ] .

Here the Deity is not at all shown or promoted as the ‘Three Face Brhma’ as claimed in Hindu mythology. However, in this book, Brahmand means ‘Universe’.  Prayers to HIM are based mere on logical ethics so the verses stay spiritual  for all religions.

The book has been praised by High Court Justices, Earth Sciences Ministry of India and Media Critics. All such high profile dignitaries are very influenced and impressed by the author’s consecrated scripture. Interested wise readers may read here what many distinguished dignitaries have to say about the author.


Naresh Sonee’s articles on TIME GOD were published  on 11/11/2006 in Global indy media. As they are quite old now so difficult to retrieve from net . Few sites still shows them. You can try these below site.







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